
संदल से महकती हुई पुर-कैफ़ हवा का,
झोंका कोई टकराए तो लगता है कि तुम हो|
जाँ निसार अख़्तर
A sky full of cotton beads like clouds

संदल से महकती हुई पुर-कैफ़ हवा का,
झोंका कोई टकराए तो लगता है कि तुम हो|
जाँ निसार अख़्तर
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