
जब दिल था शगुफ़्ता गुल की तरह टहनी काँटा सी चुभती थी,
अब एक फ़सुर्दा दिल लेकर गुलशन की तमन्ना कौन करे|
आनंद नारायण मुल्ला
A sky full of cotton beads like clouds

जब दिल था शगुफ़्ता गुल की तरह टहनी काँटा सी चुभती थी,
अब एक फ़सुर्दा दिल लेकर गुलशन की तमन्ना कौन करे|
आनंद नारायण मुल्ला
Leave a comment