
हँसते हुए चेहरों से है बाज़ार की ज़ीनत,
रोने की यहाँ वैसे भी फ़ुर्सत नहीं मिलती|
निदा फ़ाज़ली
A sky full of cotton beads like clouds

हँसते हुए चेहरों से है बाज़ार की ज़ीनत,
रोने की यहाँ वैसे भी फ़ुर्सत नहीं मिलती|
निदा फ़ाज़ली
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