ज़मीं पे नक़्श-ए-क़दम..

गुज़रने को तो हज़ारों ही क़ाफ़िले गुज़रे,
ज़मीं पे नक़्श-ए-क़दम बस किसी किसी का रहा|

कैफ़ी आज़मी

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