खुले दर-ए-रहमत कहाँ कहाँ!

हर गाम पर तरीक़-ए-मोहब्बत में मौत थी,
इस राह में खुले दर-ए-रहमत कहाँ कहाँ|

फ़िराक़ गोरखपुरी

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