देख ये वहशत कहाँ कहाँ!

दिल के उफ़क़ तक अब तो हैं परछाइयाँ तिरी,
ले जाए अब तो देख ये वहशत कहाँ कहाँ|

फ़िराक़ गोरखपुरी

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