
फ़ुर्क़त हो या विसाल वही इज़्तिराब है,
तेरा असर है ऐ ग़म-ए-फ़ुर्क़त कहाँ कहाँ|
फ़िराक़ गोरखपुरी
A sky full of cotton beads like clouds

फ़ुर्क़त हो या विसाल वही इज़्तिराब है,
तेरा असर है ऐ ग़म-ए-फ़ुर्क़त कहाँ कहाँ|
फ़िराक़ गोरखपुरी
Leave a comment