
मोहब्बत चार दिन की और उदासी ज़िंदगी भर की,
यही सब देखता है और ‘कबीरा’ रोने लगता है|
वसीम बरेलवी
A sky full of cotton beads like clouds

मोहब्बत चार दिन की और उदासी ज़िंदगी भर की,
यही सब देखता है और ‘कबीरा’ रोने लगता है|
वसीम बरेलवी
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