
ज़िंदगी से क्या लड़ें जब कोई भी अपना नहीं,
हो के शल धारे के रुख़ पर हम को बहना आ गया|
आनंद नारायण मुल्ला
A sky full of cotton beads like clouds

ज़िंदगी से क्या लड़ें जब कोई भी अपना नहीं,
हो के शल धारे के रुख़ पर हम को बहना आ गया|
आनंद नारायण मुल्ला
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