
पी के आँसू सी के लब बैठा हूँ यूँ इस बज़्म में,
दर-हक़ीक़त जैसे मुझको रंज सहना आ गया|
आनंद नारायण मुल्ला
A sky full of cotton beads like clouds

पी के आँसू सी के लब बैठा हूँ यूँ इस बज़्म में,
दर-हक़ीक़त जैसे मुझको रंज सहना आ गया|
आनंद नारायण मुल्ला
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