अब ‘मुल्ला’ को कहना आ गया!

लब पे नग़्मा और रुख़ पर इक तबस्सुम की नक़ाब,
अपने दिल का दर्द अब ‘मुल्ला’ को कहना आ गया|

आनंद नारायण मुल्ला

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