
लब पे नग़्मा और रुख़ पर इक तबस्सुम की नक़ाब,
अपने दिल का दर्द अब ‘मुल्ला’ को कहना आ गया|
आनंद नारायण मुल्ला
A sky full of cotton beads like clouds

लब पे नग़्मा और रुख़ पर इक तबस्सुम की नक़ाब,
अपने दिल का दर्द अब ‘मुल्ला’ को कहना आ गया|
आनंद नारायण मुल्ला
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