
अब क्यूँ न ज़िंदगी पे मोहब्बत को वार दें,
इस आशिक़ी में जान से जाना बहुत हुआ|
अहमद फ़राज़
A sky full of cotton beads like clouds

अब क्यूँ न ज़िंदगी पे मोहब्बत को वार दें,
इस आशिक़ी में जान से जाना बहुत हुआ|
अहमद फ़राज़
Leave a comment