
लुटा हुआ चमन-ए-इश्क़ है निगाहों को,
दिखा गया वही क्या क्या गुल ओ समर फिर भी|
फ़िराक़ गोरखपुरी
A sky full of cotton beads like clouds

लुटा हुआ चमन-ए-इश्क़ है निगाहों को,
दिखा गया वही क्या क्या गुल ओ समर फिर भी|
फ़िराक़ गोरखपुरी
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