
जो वो मिरे न रहे मैं भी कब किसी का रहा,
बिछड़ के उनसे सलीक़ा न ज़िंदगी का रहा|
कैफ़ी आज़मी
A sky full of cotton beads like clouds

जो वो मिरे न रहे मैं भी कब किसी का रहा,
बिछड़ के उनसे सलीक़ा न ज़िंदगी का रहा|
कैफ़ी आज़मी
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