
कारोबार-ए-जहाँ सँवरते हैं,
होश जब बे-ख़ुदी से मिलता है|
जिगर मुरादाबादी
A sky full of cotton beads like clouds

कारोबार-ए-जहाँ सँवरते हैं,
होश जब बे-ख़ुदी से मिलता है|
जिगर मुरादाबादी
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