
आँखें हैं कि ख़ाली नहीं रहती हैं लहू से,
और ज़ख़्म-ए-जुदाई है कि भर भी नहीं जाता|
अहमद फ़राज़
A sky full of cotton beads like clouds

आँखें हैं कि ख़ाली नहीं रहती हैं लहू से,
और ज़ख़्म-ए-जुदाई है कि भर भी नहीं जाता|
अहमद फ़राज़
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