
किसी के चेहरे को कब तक निगाह में रक्खूँ,
सफ़र में एक ही मंज़र तो रह नहीं सकता|
वसीम बरेलवी
A sky full of cotton beads like clouds

किसी के चेहरे को कब तक निगाह में रक्खूँ,
सफ़र में एक ही मंज़र तो रह नहीं सकता|
वसीम बरेलवी
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