
मैं नज़र भर के तिरे जिस्म को जब देखता हूँ,
पहली बारिश में नहाया सा शजर लगता है|
वसीम बरेलवी
A sky full of cotton beads like clouds

मैं नज़र भर के तिरे जिस्म को जब देखता हूँ,
पहली बारिश में नहाया सा शजर लगता है|
वसीम बरेलवी
Leave a comment