
हस्ती ही अपनी क्या है ज़माने के सामने,
इक ख़्वाब हैं जहाँ में बिखर जाएँ हम तो क्या|
मुनीर नियाज़ी
A sky full of cotton beads like clouds

हस्ती ही अपनी क्या है ज़माने के सामने,
इक ख़्वाब हैं जहाँ में बिखर जाएँ हम तो क्या|
मुनीर नियाज़ी
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