
हवा की तरह मुसाफ़िर थे दिलबरों के दिल,
उन्हें बस एक ही घर का अज़ाब क्या देते|
मुनीर नियाज़ी
A sky full of cotton beads like clouds

हवा की तरह मुसाफ़िर थे दिलबरों के दिल,
उन्हें बस एक ही घर का अज़ाब क्या देते|
मुनीर नियाज़ी
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