सहता है बग़ावत नहीं करता!

दुनिया में ‘क़तील’ उस सा मुनाफ़िक़ नहीं कोई,
जो ज़ुल्म तो सहता है बग़ावत नहीं करता|

क़तील शिफ़ाई

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