
एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें,
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं|
फ़िराक़ गोरखपुरी
A sky full of cotton beads like clouds

एक मुद्दत से तिरी याद भी आई न हमें,
और हम भूल गए हों तुझे ऐसा भी नहीं|
फ़िराक़ गोरखपुरी
Leave a comment