
घर ढूँड रहे हैं मिरा रातों के पुजारी,
मैं हूँ कि चराग़ों को बुझा भी नहीं सकता|
वसीम बरेलवी
A sky full of cotton beads like clouds

घर ढूँड रहे हैं मिरा रातों के पुजारी,
मैं हूँ कि चराग़ों को बुझा भी नहीं सकता|
वसीम बरेलवी
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