
हैराँ है कई रोज़ से ठहरा हुआ पानी,
तालाब में अब क्यूँ कोई कंकर नहीं गिरता|
क़तील शिफ़ाई
A sky full of cotton beads like clouds

हैराँ है कई रोज़ से ठहरा हुआ पानी,
तालाब में अब क्यूँ कोई कंकर नहीं गिरता|
क़तील शिफ़ाई
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