
निकलकर दैर-ओ-काबा से अगर मिलता न मय-ख़ाना,
तो ठुकराए हुए इंसाँ ख़ुदा जाने कहाँ जाते|
क़तील शिफ़ाई
A sky full of cotton beads like clouds

निकलकर दैर-ओ-काबा से अगर मिलता न मय-ख़ाना,
तो ठुकराए हुए इंसाँ ख़ुदा जाने कहाँ जाते|
क़तील शिफ़ाई
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