अब शजर अच्छा नहीं लगता!

बुलंदी पर उन्हें मिट्टी की ख़ुश्बू तक नहीं आती,
ये वो शाख़ें हैं जिनको अब शजर अच्छा नहीं लगता|

जावेद अख़्तर

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