जाग उट्ठे हैं आवाज़-ए-पा के साथ!

इक्कीसवीं सदी की तरफ़ हम चले तो हैं,
फ़ित्ने भी जाग उट्ठे हैं आवाज़-ए-पा के साथ|

कैफ़ी आज़मी

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