वहाँ शैख़-ओ-बरहमन की-

ब-नाम-ए-कुफ्र-ओ-ईमाँ बे-मुरव्वत हैं जहाँ दोनों,
वहाँ शैख़-ओ-बरहमन की शनासाई भी होती है|

क़तील शिफ़ाई

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