
चमकती है कोई बिजली तो शम-ए-रहगुज़र बनकर,
निगाह-ए-बरहम इनकी कुछ तो शर्माई भी होती है|
क़तील शिफ़ाई
A sky full of cotton beads like clouds

चमकती है कोई बिजली तो शम-ए-रहगुज़र बनकर,
निगाह-ए-बरहम इनकी कुछ तो शर्माई भी होती है|
क़तील शिफ़ाई
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