दर्द का रस्ता छोड़ दिया है!

एक ‘फ़राज़’ तुम्हीं तन्हा हो जो अब तक दुख के रसिया हो,
वर्ना अक्सर दिल वालों ने दर्द का रस्ता छोड़ दिया है|

अहमद फ़राज़

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