
अपना ये शेवा तो नहीं था अपने ग़म औरों को सौंपें,
ख़ुद तो जागते या सोते हैं उसको क्यूँ बे-ख़्वाब किया है|
अहमद फ़राज़
A sky full of cotton beads like clouds

अपना ये शेवा तो नहीं था अपने ग़म औरों को सौंपें,
ख़ुद तो जागते या सोते हैं उसको क्यूँ बे-ख़्वाब किया है|
अहमद फ़राज़
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