उसको क्यूँ बे-ख़्वाब किया है!

अपना ये शेवा तो नहीं था अपने ग़म औरों को सौंपें,
ख़ुद तो जागते या सोते हैं उसको क्यूँ बे-ख़्वाब किया है|

अहमद फ़राज़

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