
फ़स्लें पक जाएँ तो खेत से बिछ्ड़ेंगी,
रोती आँख को प्यार कहाँ समझाने दे|
वसीम बरेलवी
A sky full of cotton beads like clouds

फ़स्लें पक जाएँ तो खेत से बिछ्ड़ेंगी,
रोती आँख को प्यार कहाँ समझाने दे|
वसीम बरेलवी
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