
जिसकी साँसों से महकते थे दर-ओ-बाम तिरे,
ऐ मकाँ बोल कहाँ अब वो मकीं रहता है|
अहमद मुश्ताक़
A sky full of cotton beads like clouds

जिसकी साँसों से महकते थे दर-ओ-बाम तिरे,
ऐ मकाँ बोल कहाँ अब वो मकीं रहता है|
अहमद मुश्ताक़
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