मिरा हम-ज़बाँ नहीं मिलता!

जो इक ख़ुदा नहीं मिलता तो इतना मातम क्यूँ,
यहाँ तो कोई मिरा हम-ज़बाँ नहीं मिलता|

कैफ़ी आज़मी

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