कुछ भी यहाँ नहीं मिलता!

खड़ा हूँ कब से मैं चेहरों के एक जंगल में,
तुम्हारे चेहरे का कुछ भी यहाँ नहीं मिलता|

कैफ़ी आज़मी

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