आसमानों के ख़ज़ाने चाहिएँ!

कुछ परिंदों को तो बस दो चार दाने चाहिएँ,
कुछ को लेकिन आसमानों के ख़ज़ाने चाहिएँ|

राजेश रेड्डी

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