
कितने शीरीं हैं तेरे लब कि रकीब,
गालियां खा के बे मज़ा न हुआ|
मिर्ज़ा ग़ालिब
A sky full of cotton beads like clouds

कितने शीरीं हैं तेरे लब कि रकीब,
गालियां खा के बे मज़ा न हुआ|
मिर्ज़ा ग़ालिब
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