
आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब,
दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होते तक|
मिर्ज़ा ग़ालिब
A sky full of cotton beads like clouds

आशिक़ी सब्र-तलब और तमन्ना बेताब,
दिल का क्या रंग करूँ ख़ून-ए-जिगर होते तक|
मिर्ज़ा ग़ालिब
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