नाम तुम्हारा मुझे जपना नहीं आता!

ये अश्क-ए-मुसलसल हैं महज़ अश्क-ए-मुसलसल,
हाँ नाम तुम्हारा मुझे जपना नहीं आता|

आनंद नारायण मुल्ला

Leave a comment