बदन की क़ब्र में कब से गड़ा हूँ मैं!

मैं ख़ुदकशी के जुर्म का करता हूँ ऐतराफ़,
अपने बदन की क़ब्र में कब से गड़ा हूँ मैं|

क़तील शिफ़ाई

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