
मैं ख़ुदकशी के जुर्म का करता हूँ ऐतराफ़,
अपने बदन की क़ब्र में कब से गड़ा हूँ मैं|
क़तील शिफ़ाई
A sky full of cotton beads like clouds

मैं ख़ुदकशी के जुर्म का करता हूँ ऐतराफ़,
अपने बदन की क़ब्र में कब से गड़ा हूँ मैं|
क़तील शिफ़ाई
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