
तुझ पे मरते हैं ज़िन्दगी अब भी,
झूठ लिक्खें तो ये क़लम टूटे|
सूर्यभानु गुप्त
A sky full of cotton beads like clouds

तुझ पे मरते हैं ज़िन्दगी अब भी,
झूठ लिक्खें तो ये क़लम टूटे|
सूर्यभानु गुप्त
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