बहार आई चमन में या ख़िज़ाँ आई!

क़फ़स में मौसमों का कोई अंदाज़ा नहीं होता,
ख़ुदा जाने बहार आई चमन में या ख़िज़ाँ आई|

मुनव्वर राना

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