
भूखा पेट न जानता क्या है धर्म-अधर्म,
बेच देय संतान तक, भूख न जाने शर्म|
गोपाल दास नीरज
A sky full of cotton beads like clouds

भूखा पेट न जानता क्या है धर्म-अधर्म,
बेच देय संतान तक, भूख न जाने शर्म|
गोपाल दास नीरज
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