
दूरभाष का देश में जब से हुआ प्रचार,
तब से घर आते नहीं चिट्ठी पत्री तार|
गोपाल दास नीरज
A sky full of cotton beads like clouds

दूरभाष का देश में जब से हुआ प्रचार,
तब से घर आते नहीं चिट्ठी पत्री तार|
गोपाल दास नीरज
Leave a comment