
वीराँ है मयकदा ख़ुमो-सागर उदास हैं,
तुम क्या गये कि रूठ गए दिन बहार के|
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
A sky full of cotton beads like clouds

वीराँ है मयकदा ख़ुमो-सागर उदास हैं,
तुम क्या गये कि रूठ गए दिन बहार के|
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
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