
हम इश्क़ के मारों का इतना ही फ़साना है,
रोने को नहीं कोई हँसने को ज़माना है |
जिगर मुरादाबादी
A sky full of cotton beads like clouds

हम इश्क़ के मारों का इतना ही फ़साना है,
रोने को नहीं कोई हँसने को ज़माना है |
जिगर मुरादाबादी
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