
क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है,
हम ख़ाक-नशीनों की ठोकर में ज़माना है|
जिगर मुरादाबादी
A sky full of cotton beads like clouds

क्या हुस्न ने समझा है क्या इश्क़ ने जाना है,
हम ख़ाक-नशीनों की ठोकर में ज़माना है|
जिगर मुरादाबादी
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