
घास के घरौंदे से ज़ोर-आज़माई क्या,
आँधियाँ भी पगली है बर्क भी दिवानी है|
कैफ़ भोपाली
A sky full of cotton beads like clouds

घास के घरौंदे से ज़ोर-आज़माई क्या,
आँधियाँ भी पगली है बर्क भी दिवानी है|
कैफ़ भोपाली
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