कुछ दिन ही अच्छा लगता है!

तुम क्या बिछड़े भूल गये रिश्तों की शराफ़त हम,
जो भी मिलता है कुछ दिन ही अच्छा लगता है|

निदा फ़ाज़ली

Leave a comment