
छप्पर के चायख़ाने भी अब ऊंघने लगे,
पैदल चलो के कोई सवारी न आएगी|
बशीर बद्र
A sky full of cotton beads like clouds

छप्पर के चायख़ाने भी अब ऊंघने लगे,
पैदल चलो के कोई सवारी न आएगी|
बशीर बद्र
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